एक कठपुतली जैसी मुद्रा वाले एक रोगी के साथ दो जने डाक्टर के पास ( यानि मेरे पास )आते हैं॥
डॉ: हाँ जी बोलो ...
आदमी : मरीज़ भरती करना है ।
डॉ : पहले ये तो बताओ की परेशानी क्या है ॥सीधा भरती कर दू ?
आदमी : मेंटल है मरीज़ ॥
डॉ : ये तो अस्पताल ही मेंटल मरीजों का है ,तुम ये बताओ हुआ क्या है मरीज़ को ,फ़िर फ़ैसला करेंगे भरती का।
आदमी : दिमाग का मरीज़ है
डॉ : अरे भाई ..इस अस्पताल में केवल दिमाग के मरीजों का ही इलाज़ होता है ,तू ये बता तेरे मरीज़ को क्या हुआ है ..।
दूसरा आदमी : जी , मरीज़ हाफ माइंड हो गया है ॥
डॉ का पारा चढ़ने लगता है ...
डॉ :जब तूने इतना ही पता कर लिया की मरीज़ हाफ माइंड है तो इलाज़ भी तू ही लिख दे ....
आदमी भी झुंझला जाता है ।उसको समझ नही आ रहा की डॉ आखिर चाहता क्या है ..
आदमी : अजी इलाज़ मै ही लिख देता तो यहाँ क्यों आता...
डॉ : अबे यार तू किस भाषा में समझेगा ...मैंने ये नही पुछा की मरीज़ मेंटल है या डेंटल है ..मै ये पूछ रहा हु की मरीज़ को आखिर हुआ क्या है ,क्या लक्षण है क्या असामान्यता है , व्यवहार में क्या विसंगतियां है ...???...वो जाट थे शुद्ध हिन्दी तो वो अंग्रेज़ी से भी कम समझते थे
दूसरा आदमी : अजी हुआ तो ये ही है की मरीज़ का दिमाग out हो गया है
dr: @%$%$%$#^%#@$@#$#@$.... $%$%!@%%!@
शनिवार, 16 अगस्त 2008
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5 टिप्पणियां:
हा हा हा........ये वाला तो ज़बरदस्त है........हा हा हा ..........
kuch aur bhi likhne wala hu aisa hi....
jabardast. kikhta rah parth .achcha likhta h.
Navendu
ye gapp kahaan hai yaar, ye to sachch hai .
abhi parha , hanste hanste main bhi mental ho gaya do sab.
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