गुरुवार, 5 नवंबर 2009

हमारे बिहारी सुपरमैन

आज मै आप लोगो को अपने बिहारी भाइयो की कुछ चारित्रिक विशेषताओ के बारे में बताऊंगा। ये तो आप सभी जानते हैं की हमारे बिहारी भाई बेहद मेहनती और संघर्षशील होते हैं पर मै इन गुणों से इतर कुछ बातें उदाहरण सहित बताऊंगा। ...
१) हर बिहारी अपनी आप को प्रेमचंद का छोटा भाई अर्थात हिन्दी का महान विद्वान् समझता है। विशेष तौर पर जब उनको अपनी बात पर ज़ोर देना हो या फ़िर जब उनकी बात पर कोई कान नही धर रहा हो तो वे तेज़ तेज़ शुद्ध हिन्दी बोलने का प्रयास करते हैं हालाँकि उनके बराबर हिन्दी व्याकरण की गलतियां शायद ही कोई और करता हो ॥ एक उदहारण देंखे
" हमारी गाड़ी दिल्ली जंक्शन से छौ बजे खुली थी मगर रस्ते में जो है एकठो एक्सीडेंट हो गया था इसी कारज इग्यारह बजे पहुँची । स्टेशन पर इतना मच्छड़ था कि हमने तो हाथ जोर लिया । "
२) हर बिहारी भाई अपने आप को राजनीती का विशेषज्ञ या आचार्य समझता है। उनकी हर बात घूम फ़िर कर लालू जी, नीतीश जी, जॉर्ज जी या रामविलास जी पर आ जाती है। उनको लगता है कि देश उनके राजनैतिक ज्ञान के भरोसे ही चल रहा है । एक सच्चा उदाहरण देखें ॥
डॉ.(पार्थ , मेडीसिन पोस्टिंग के दौरान ): माताजी, दो महीने पहले आप चल फ़िर पाती थीं
मरीज़ : हाँ , जाते थे न॥ पहले तो हम अपने घर से ३ किलो मीटर दूर लालू जी के घर तक हो आते थे॥ फ़िर वहां से वापिस सचिवालय होते हुए घर आते थे..
डॉ: बच्चे कितने हैं?
मरीज़ : अब क्या कहें? लरके तो तीन थे पर अब दो ही समझो...सबसे बड़ा वाला है न॥ वो दुकान करता है, जनता दल का कार्यकर्ता है, पहले लालू जी की पार्टी में था पर उसके पसंद के आदमी को टिकट नहीं दिया तो जनता दल में आ गया....मझला उसको बहुत समझाया की ऐसे दल बदलने से जनता में बिस्वास कम होता है.... blah ..blah...
३) बिहारी भाई चाहे चाहे रिक्शा चलाये या जूता गांठे, पर बिहार का हर बड़ा नेता उनका घर का आदमी होता है॥और ये बात वे बिना पूछी ही बता देंगे ।दो हफ्ते पहले की ही बात है, मै दिल्ली गया ..बस में बैठा एक अधेड़ से आदमी की बाते सुन रहा था.." देखिये हम दिल्ली में नए हैं हमको जनपथ का रास्ता बता दीजियेगा .....ये कौनसा जगह है? कनाट पैलेस है.. अच्छा.. ..और अब ? अभी तो बंगला साहिब गुरुद्वारा आया है,.अभी तो टाइम है ...हमको जनपथ में उतरवा दीजियेगा॥ ठीक है? जनपथ पे हमको राम विलास जी पासवान के बंगले पर जाना है ना । (अबे तुझसे पूछा किसने है?)
4) बिहारी भाई जो कि दिल्ली या ऐसे ही किसी बड़े शहर में आकर अपने आपको हृतिक रोशन का हमशक्ल समझने लगता है॥ उसे लगता है की मोबाइल सिर्फ उसके पास है, इन्टरनेट का नाम सिर्फ उसी ने सुना है और मेट्रो में सिर्फ वो ही बैठा है...भीड़ में जब वो मोबाइल पे बात करता है ..सबको सुना सुना के ऐसी फेंकता है कि लगता है कि या तो उसको पूरी दुनिया मूर्ख और निरक्षर दिखाई पड़ती है या फिर उसमे insight का नामो-निशान नहीं है..बात करते हुए वो आस पास घूम कर देखता है कि लोग उसी को निहार रहे हैं न। और उसकी विद्वता पे न्योछावर हुए जा रहे हैं. ..
तो प्यारे मित्रो .... ये चंद चारित्रिक विशेषताएं हैं जिनका मैंने अतिशयोक्ति पूर्ण वर्णन किया....कही सुनी माफ़ करना ..ये सब मजाक ही है..सीरियसली मत लेना

2 टिप्‍पणियां:

Anil Kumar ने कहा…

सुन्दर व्यंग्य - लेकिन बेचारे बिहारियों की बहुत मिट्टी-पलीत की है!

Neetesh ने कहा…

हा हा.......काफी सही चित्रण!