यदि आप डॉक्टर हैं तो ये आप सभी के साथ हुआ ही होगा ये मई दावी के साथ कह सकता हूँ । घर मी किसी को महज़ सर्दी जुकाम हो या फ़िर सिरदर्द हो तब तक तो आपको आपके घरवाले दवा के लिए पूछेंगे ..इस्ससे ज़्यादा कुछ हुआ तो आपसे पूछेंगे " तुम्हारी नज़र में कोई अच्छे डॉक्टर है क्या?"...आप भोंच्चाक्के रह जाते हैं ..कि साला ये क्या सवाल हुआ ? मै अदृश्य हूँ क्या ? इतना well qualified डॉक्टर सामने खड़ा हुआ है और उसी से पूछ रहे हैं कि कोई अच्छा डॉक्टर है क्या ...यानि आपके अपने लोगो कि नज़र में आप सिर्फ़ एक लड़के हैं जिसने डाक्टरी पद्धि हुई है बस..उससे ज़्यादा आप कुछ नही ।
आप फ़िर कुंठित मन से पूछते हैं कि "बोलो क्या हुआ ?"..यूँ ही..बदन ज़रा गर्म सा महसूस होता है ..हल्का बुखार सा..थकावट रहती है..सोच्चा कि किसी अच्च्चे डॉक्टर को लिखा लूँ । आप नब्ज़ टटोलते हैं , माथे पर हाथ रखते हैं , स्टेथ से धड़कन और छाती का हाल लेते हैं और बेफिक्र होकर कहते हैं " कुछ नही है..सब ठीक है। बस आप यहीं मार खा जाते हैं , यहीं आपकी काबिलियत पर से विश्वास उठ जाता है आपके घरवालो का । इन्ही शिकायतों के आधार पर कोई अच्छा सा डॉक्टर उनको सात सौ रूपये कि दवा चेप देता और आपको दस दिन का bed rest लिख देता जो । एक तरफ़ आप हैं कि कह दिया कि कुछ नही हुआ , सब ठीक है। आप उस अच्छे डॉक्टर कि लिखी हुई दवाओ को गौर से देखते हैं और लगभग डांटने की टोन में कहते हैं " किस गधे को दिखा आए ? साले ने बेवजह २ antibiotic चेप डाली..२ दर्द की दावा और २ ही तथाकथित ताकत की दवा भी... आप पर फ़िर चोट की जाती है। M।D. डॉक्टर है , फलां हॉस्पिटल में इतने सालो से काम कर रहा है। इतना ही बेवकूफ होता तो कब का डाक्टरी बंद हो जाती उसकी । उनके कहने का परोक्ष मतलब होता है की " तुम बेवकूफ हो और तुम्हारी डाक्टरी चल नही सकती"।
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2009
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

13 टिप्पणियां:
डा० साहब आपकी आप बीती बहुत ही रोचक लगी और बिना हँसे रह न सका। मुझे तो लगता है कि आप लेखन क्षेत्र में बढ़िया डाक्टर साबित होंगे। सुन्दर पोस्ट।
सादर
श्यामल सुमन
www.manoramsuman.blogspot.com
हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं.....
इधर से गुज़रा था, सोचा सलाम करता चलूं
http://www.samwaadghar.blogspot.com/
बिल्कुल सही फरमाया ।
वो कहते हैं ना कि घर की मुर्गी दाल बराबर..सो घर का डॉक्टर भी...
dal ke bhav kuchh kam nhin hain janab,apane ko ka keemat na samajhen.
baaki sab toh khik hai lekin aapnhe daal kah kar khud ke bhaav badhaa liye.....ha ha ha
सहमत हूँ आपसे.
हा हा हा......बिलकुल सत्य वचन.......जय हो! :)
बहुत अच्छा लेख है, स्वागतम्।
http://myrajasthan.blogspot.com
आनंद फिल्म में भी अमिताभ के साथ यही परेशानी थी, असितसेन बड़ी उम्मीदों के साथ आते थे उनके पास कि कोई बड़ी बीमारी बता कर दवाई देंगे।
आपकी आपबीती भी मजेदार रही, हंसी आ गई।
:)
hota to aisa hee hai.narayna narayan
हिंदी ब्लॉग लेखन के लिए स्वागत और शुभकामनायें
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें तथा अपने सुन्दर
विचारों से उत्साहवर्धन करें
too true,even i had similiar experience,more than once but rather feel like an idiot i tuk it otherwise..."FOGATIO"(WITHOUT MONEY)se tau bina patient better hai...hahaha.
एक टिप्पणी भेजें